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सुप्रीम कोर्ट में हर सप्ताह 2 दिन होगी वर्चुअल सुनवाई, ईंधन बचाने के लिए बड़ा फैसला

 Reported By: Atul Bhatia, Edited By: Shakti Singh
 Published : May 15, 2026 05:15 pm IST,  Updated : May 15, 2026 05:24 pm IST

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार और शुक्रवार को वर्चुअल सुनवाई होगी। वहीं, सप्ताह के बाकी तीन दिन हाइब्रिड सुनवाई होगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के जज ईंधन बचाने के लिए कार पूलिंग भी करेंगे।

Supreme Court- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट Image Source : SUPREME COURT

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कामकाज को लेकर नया सर्कुलर जारी किया है। इसमें अदालत की सुनवाई और कर्मचारियों के काम करने के तरीके में बड़े बदलाव किए गए हैं। यह फैसला केंद्र सरकार के एक आदेश के बाद लिया गया है और इसे तुरंत लागू कर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के सर्कुलर के मुताबिक अब सोमवार, शुक्रवार और दूसरे ऐसे दिन, जिन्हें “मिसलेनियस डे” कहा जाता है, उन दिनों मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। इसके अलावा कोर्ट के आंशिक कार्य दिवसों में भी सुनवाई ऑनलाइन ही की जाएगी। कोर्ट प्रशासन को कहा गया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिंक समय पर भेजे जाएं और तकनीकी व्यवस्था मजबूत रखी जाए ताकि किसी को परेशानी न हो।

सुप्रीम कोर्ट के जज भी करेंगे कार पूलिंग

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने ईंधन बचाने के लिए आपस में कार पूलिंग को बढ़ावा देने का भी फैसला लिया है। यानी जज अब जरूरत के मुताबिक एक ही गाड़ी में साथ सफर करेंगे। सर्कुलर में कोर्ट कर्मचारियों को लेकर भी अहम फैसला किया गया है। आदेश के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की हर शाखा और सेक्शन में 50 फीसदी तक कर्मचारियों को हफ्ते में दो दिन घर से काम करने की अनुमति दी गई है। हालांकि बाकी कर्मचारियों को दफ्तर में मौजूद रहना होगा ताकि कोर्ट का काम प्रभावित न हो।

कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति

आदेश में यह भी साफ किया गया है कि जिन कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति मिलेगी, उन्हें फोन पर हमेशा उपलब्ध रहना होगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत दफ्तर आना पड़ेगा। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सभी जरूरी काम समय पर पूरे हों। अगर किसी शाखा में काम की जरूरत ज्यादा है और घर से काम करना ठीक नहीं माना जाता, तो संबंधित रजिस्ट्रार उस शाखा में वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था को बदल या सीमित कर सकता है। यह सर्कुलर सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल भारत पराशर की तरफ से जारी किया गया है।

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